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2017 चुनाव से पहले लखनऊ में सैफुल्लाह का एनकाउंटर किया अब 2022 चुनाव से पहले लखनऊ में दो लोगों को अलकायदा के नाम पर गिरफ्तार किया गया है |

 20172017 चुनाव से पहले लखनऊ में सैफुल्लाह का एनकाउंटर किया अब 2022 चुनाव से पहले लखनऊ में दो लोगों को अलकायदा के नाम पर गिरफ्तार किया गया है |

आपको याद होगा सैफुल्लाह तथाकथित एनकाउंटर मामले में एटीएस अधिकारी असीम अरुण ने सैफुल्लाह को आईएसआईएस का बताया था बरामदी के नाम पर सोशल मीडिया पर आईएस का झंडा और अल्लाह के साथ फोटो वायरल किया गया था जबकि उसी शाम को ही एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दलजीत चौधरी ने कहा था कि सैफुल्लाह का आई एस से कोई संबंध नहीं था आईजी लोक शिकायत विजय सिंह मीना ने असीम अरुण के उलट बयान दिया था |

बाद में जब पूछा गया कि सैफुल्लाह के पास कोई हथियार नहीं थे फिर एनकाउंटर क्यों किया ? जवाब में असीम अरुण को कहना पड़ा कि कहीं न कहीं पुलिस से भारी चूक हुई है |सवाल यह है कि चुनावी माहौल बनाने के लिए मुस्लिमों को ही क्यों टारगेट किया जाता है ?

पाकिस्तान को खूफिया जानकारी देने और आतंकियों के साथ सांठ गांठ के इल्ज़ाम में सिक्ख समुदाय के देवेंद्र सिंह (डीएसपी जम्मू कश्मीर पुलिस) रंगे हाथों पकड़ा गया था 

हाल ही में 6 जुलाई को पाकिस्तान को 900 सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स देने के इल्ज़ाम में पंजाब पुलिस ने आर्मी के दो जवानों क्रमशः हरप्रीत सिंह और गुरप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया है इससे पहले भी इसी कई घटनाएं हो चुकी हैं 

फ़िर राजनैतिक दलों ने पंजाब में इनको लेकर चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बनाया गया ? क्यों इनपर राजनैतिक रोटियां नहीं सेंकी गईं ? सत्ता पर काबिज़ होने के लिए हमेशा मुस्लिमों को ही क्यों टारगेट किया जाता है ?

मेरी नज़र में इसका मुख्य कारण सियासी वुजूद न होना ही है सिक्ख समाज का सियासी वुजूद है लेकिन मुस्लिम समाज का नहीं है जब तक सियासी वुजूद नहीं होगा तब तक मुस्लिम सियासी ईंधन बनता रहेगा अतः लड़ाई सियासी हिस्सेदारी पाने की होना चाहिए न कि दरबारी की |


#क़लम_का_शहज़ादा

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