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गड्ढों में जिंदगी

  
लेखक-  एस ए बेताब 
कहते हैं कि जिंदगी बदलाव चाहती है और यह बात सत्य है ।बिना बदलाव के जीवन अधूरा है,बदलाव खुद आता है या बदलाव को दूसरे लोग लाते हैं। बदलाव निजी जिंदगी का हो या बदलाव व्यवस्था का हो उसके लिए बहुत बड़ा तूफान खड़ा करना पड़ता है ,उस तूफान को लेकर चलना पड़ता है ,तभी बदलाव आता है । आप अगर यह समझे किसी समस्या दूर करने के लिए मात्र सोचने से वह दूर हो जाएगी।  यह आपका वहम है । इसके लिए आपको संघर्ष करना पड़ेगा,और संघर्ष का दूसरा नाम ही बदलाव है । हम आपको एक उदाहरण देना चाहते हैं जब आप सड़क पर चलते हैं तो आप देखते हैं कि बहुत सारे गड्ढे आपके मार्ग में आते हैं, जब आप प्रतिदिन के यात्री हैं तो आपको उन गड्ढों का एहसास रहता है और उन गड्ढों से बचकर आप निकलते रहते हैं ,मगर कभी-कभी ऐसा भी होता है थोड़ी सी लापरवाही थोड़ी सी अंजाना पन आपको उस गड्ढे में ले जाता है और दुर्घटना घट जाती है।  सब लोग सड़क पर रोजाना जाते हैं मगर गड्ढा भरने का ख्याल किसी को नहीं आता ।  यही कारण है  वह गड्ढा बढ़ता चला जाता है और कभी-कभी यह गड्ढा किसी को घायल कर जाता है, कभी तो किसी की जान भी ले लेता है।  अब गड्ढा भरने की जिम्मेदारी जिसकी है वह चादर तान के सोता रहता है।  और सड़क पर चलने की जिम्मेदारी जिसकी है वह गड्ढों से बचते बचाते चलता रहता है, लेकिन जितने मुसाhttps://youtu.be/ddgs5B0aEyoफिर उस रोड से जाते हैं अगर 25% लोग भी है सोच ले कि यह सड़क हमारी है और हमें रोज इस पर चलना है और अगर दुर्घटना होगी तो  नुकसान भी हमारा ही होगा,क्यों ना हम मिलकर इस समस्या का समाधान करें। जिस दिन यह सोच बनेगी आपकी बहुत सारी समस्याएं दूर हो जाएगी। यह बात सड़क के गड्ढों की भी है और आपके जिंदगी के गड्ढों की भी है अब आप तय करें क्या आपको करना क्या है।










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