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हमारा भविष्य अंधकार में क्यों नजर आता है ?

एस ए बेताब संपादक
बेताब समाचार एक्सप्रेस 

 हमारा भविष्य अंधकार में क्यों नजर आता है ? यह सवाल जब एक नौजवान ने  किया तो मुझ जैसे पत्रकार को दिमाग की कई परतें खोलने की जरूरत पड़ी। सवाल ही ऐसा था जिसका जवाब देने भर से काम नहीं चलने वाला था, उस नौजवान को जवाब से संतुष्ट भी करना था ।यह सवाल उत्तर प्रदेश के एक नौजवान का था जिस का कहना था कि गाजीपुर में एक अस्पताल तोड़ा गया, अब मौलाना मौहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने की तैयारी है। जब शांतिपूर्ण सीएए का विरोध करना चाहा तो लाठियां और गोलियां मिली। उत्तर प्रदेश में 19 दिसंबर 2019 को 22 लोगों की जान गई। फर्जी मुठभेड़ में कितने लोग अब तक मारे जा चुके हैं। अवैध गिरफ्तारियां,लव जिहाद ,धर्मांतरण के नाम पर तो कभी किसी के नाम पर, आखिरकार हमें इन समस्याओं से छुटकारा क्यों नहीं मिलता ?हमारा भविष्य अंधकार में क्यों नजर आता है? इस सवाल का जवाब देने के लिए मैंने उस नौजवान से कहा कि क्या तुम्हारे पास कुछ वक्त है तो उसने जवाब दिया कि अभी तो मैं जल्दी में हूं यही हाल है सवाल पूछने वालों का मैंने उस नौजवान से कहा आप अपने चार पांच मिनट मुझे दें मैंने उसे कुछ बातें बताई।  जब भी कोई गंभीर  समस्या के लिए सवाल पूछा जाता है सवाल पूछने वाले के पास उस सवाल का जवाब सुनने का भी वक्त नहीं होता है। एक बात बेहद जरूरी है जब हम किसी गंभीर व  खतरनाक बीमारी का इलाज कराने डॉक्टर के पास जाते हैं,तो वह डाक्टर  पहले मरीज को तसल्ली से देखता है फिर कुछ जाचे लिखता है। उनके आने के बाद फिर कुछ और जाँचे लिखता है। खूब तसल्ली करता है। कई बार तो वह उनसे भी संतुष्ट नहीं होता तो कुछ ब्लड लेकर जांच अमरीका  वगैरह में भेजता है। और जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद उसका इलाज शुरू किया जाता है। उस इलाज के बाद ही उस व्यक्ति को लाभ और हानि का पता चलता है। मुझे याद है 15 अप्रैल 1996 को मैंने मौलाना वहीदुद्दीन खान साहब का एक इंटरव्यू किया था ।मेरे जेहन में एक सवाल था मैं उस सवाल का जवाब चाहता था  कि एक आदमी दिन रात ईमानदारी से मेहनत करता है  फिर भी उसे कामयाबी नहीं मिलती है इसकी क्या वजह है ? जो जवाब मौलाना साहब ने दिया था वह मुझे आज भी याद है ।मौलाना साहब ने बताया था कि उस इंसान को अपनी कमियों को तलाश करके उस पर मेहनत करनी चाहिए इंशाल्लाह उसे सफलता जरूर मिलेगी।

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