सईद अख्तर ग्राम प्रधान रुहासा का चले जाना मौत एक समाजसेवी की बहुत याद आएगी ।
सईद अख्तर मेरठ जिले के सरधना तहसील के ग्राम रुहासा के प्रधान ही नहीं थे वह एक समाजसेवी भी थे। सरधना कस्बे में अक्सर उनसे मुलाकात हुई एक पत्रकार की हैसियत से उनसे ज्यादा घनिष्ठता तो नहीं थी लेकिन जब भी मिला तो उन्होंने मुस्कुरा कर मेहमान नवाजी की। किसी चुनाव कार्यालय का परिदृश्य कैसे भुलाया जा सकता है। मरहूम बाबू जी अब्दुल वहीद कुरैशी पूर्व विधायक की कोठी के सामने या फिर कोई अन्य मौका हो सरधना नगर पालिका परिषद का चुनाव का समय हो या फिर कोई अन्य मुख्य मुद्दा उनसे अक्सर मुलाकात हो जाती थी। एक राजनीतिक व्यक्ति की पहचान होती है कि वह अपने विचारों से प्रभावित करता है। सईद अख्तर रिजवी ने यह काम बखूबी जिंदगी भर निभाया।
अपने गांव रुहासा का प्रधान बन कर उन्होंने गरीबों की सेवा की । जो एक प्रधान का दायित्व होता है उसको उन्होंने बखूबी निभाया। एक समाजसेवी के तौर पर उनका एक मिशाली जीवन था। वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे ।पिछले दिनों उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया तो उनकी रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव आया था। और आखिरकार मौत का एक वक्त मुकर्रर है और जाना ही पड़ता है। और सईद अख्तर रिजवी इस दुनिया ए फानी से चले गए। लेकिन वह हमेशा याद आएंगे। अल्लाह ताला उनकी मगफिरत फरमाए ।आमीन - सुम्मा आमीन
एस ए बेताब पत्रकार
शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत* पीलीभीत: संगम फाउंडेशन व हिंदी उर्दू मंच के संयुक्त तत्वावधान में एक शानदार नातिया मुशायरा जश्ने ईद मिलादुन्नबी के सिलसिले में हाजी ज़हीर अनवर की सरपरस्ती में ग्रेस पब्लिक स्कूल ख़ुदा गंज में आयोजित किया गया जिसकी *सदारत मौलाना मुफ्ती हसन मियां क़दीरी* ने की, निज़ामत का कार्य ज़ियाउद्दीन ज़िया एडवोकेट ने किया जनाबे सदर हसन मियां कदीरी ने अपने कलाम मे कहा जलवाए हुस्ने इलाही प्यारे आका की है जात,रुख से रोशन दिन हैं उन के जुल्फ़ का सदका है रात मुशायरा कनवीनर मुजीब साहिल ने यूं फरमाया दिल के बोसीदा ज़ख्म सीने को इश्क वाले चले मदीने को हाशिम नाज़ ने अपनी नात पढ़ते हुए कहा बिना ज़िक्रे नबी मेरी कोई पहचान थोड़ी है,कि नाते मुस्तफा लिखना कोई आसान थोड़ी है नाजिम नजमी ने अपने कलाम में यूं कहा सुकूने दिल नहीं मिलता उसे सारे जमाने में बुलालो अबतो आका मुझ को अपने आस्ताने में हर सिमत यहां बारिशे अनवारे नबी है उस्ताद शायर शाद पीलीभीती ने अपने मखसूस अंदाज में कहा बन के अबरे करम चार सू छा गए जब जहां में हबीबे खुद...

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