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सीमापुरी क्षेत्र के विधायक राजेंद्र पाल गौतम चौधरी शेर नबी चमन की जमीन पर बनाना चाहते हैं स्कूल? चौधरी शेर नबी चमन से एस ए बेताब की बातचीत

 






उ0 पू0 दिल्ली के वरिष्ठ समाजसेवी एवं उ0पू0 दिल्ली लोकसभा से चुनाव लड़ चुके पूर्व प्रत्याशी चौ शेरनबी चमन से ‘‘हम करेंगे समाधान’’ अखबार के संपादक एस ए बेताब से बातचीत

सवालः चौ. शेरनबी चमन साहब एफ-2 एफ-1 सुन्दर नगरी दिल्ली 93 के बीच चमन एस्टेट पर सीमापुरी के विधायक राजेन्द्रपाल गौतम स्कूल बनाना चाहते हैं? यह ज़मीन आपकी है तो सरकार इस जमीन पर स्कूल कैसे बना सकती है? 

जवाबः बेताब साहब! मुझे सुनने में आया है कि माननीय राजेन्द्रपाल गौतम जी मेरी ज़मीन पर कोई मॉडल स्कूल बनाना चाहते हैं। यह बात बिल्कुल इस तरह की है जैसे कोई लूट का माल दान कर रहा हो, अगर उन्हें स्कूल ही बनाना है तो सरकार ज़मीन ख़रीदे और स्कूल बना कर दे। बज़ोर ताकत तो वो हमारा घर भी हम से छीन सकते हैं, हमें जान से मरवा सकते हैं। हम पर झूठे मुकदमे लगवा कर हमें जेल भी भेज सकते हैं। किसी साजिश के तहत हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवा कर मुझे उसमें फंसा सकते हैं। लेकिन ईमादारी और क़ानूनी तौर पर वो मेरी ज़मीन नहीं छीन सकते। अगर वाकई वो ईमानदार हैं तो मैं कहना चाहता हूं वो राजा हैं मैं प्रजा हूं। वो बेहतरीन से बेहतरीन पटवारी लेकर आएं और मेरी ज़मीन को सरकारी साबित करके दिखाएं। या मेरी ज़मीन मेरी नहीं है यह साबित करके दिखलाएं। सूत्रों से मुझे ज्ञात हुआ है कि दिल्ली सरकार के किसी मंत्री ने डीडीए वालों से निवेदन करके सुन्दर नगरी में ढ़ाई एकड़ ज़मीन पर बांउन्डरी वाल करने का लैटर प्राप्त किया है लेकिन उस लैटर में न कोई खसरा नम्बर है ना कोई लोकेशन लिखी है। एरिया एसडीम को यह बात कही गई कि कमिश्नर को कहकर मंत्री महोदय फोर्स दिलवा देंगे और इसी पत्र के आधार पर चमन एस्टेट नामक जगह को कब्ज़ा कर लिया जाएगा। सूत्रों से पता चला है कि एसडीएम महोदय ने पहले तो इन्कार कर दिया था कि मैं कन्डम ऑफ कोर्ट नहीं लगवाना चाहता कि चौ0 चमन को उक्त जमीन का माननीय हाई कोर्ट द्वारा मालिक घोषित किया जा चुका है। लेकिन फिर उनसे कहा गया कि इस ज़मीन पर कब्जा करने के बाद हम लोगों को बहुत फायदा होगा। शायद फिर एसडीएम महोदय मान गए।

सवाल: चौ0 चमन साहब आप के पास इस ज़मीन के मालिक होने के क्या सबूत हैं?

जवाबः मुझे इस ज़मीन के विषय में 2006 में कोर्ट के हुक्म से एरिया एसडीएम के ऑफिस से एक एनओसी प्राप्त हुई। जिसमें चार एसडीएम एक तहसीलदार एक सब रजिस्ट्रार दो कानूनगो एक पटवारी ने यह माना कि यह ज़मीन प्राईवेट है और अगर चौ0 चमन इसे बेचना चाहे तो बेच सकता है इसमें धारा 33 की अवहेलना नहीं होती है। मुझे 2007 में भी कोर्ट द्वारा एक डिगरी भी प्राप्त हो चुकी है, जिसमें जज साहब ने लिखा है कि हमने मुद्दई को भी सुना, गवाहों को भी सुना। सबको सुनने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस जमीन का मालिक चौ0 चमन है। मेरा एक मुकदमा डीडीए और ऐजुकेशन वालों से ज़ेरे समात रहा है लेकिन 2014 में हाईकोर्ट द्वारा डीडीए व ऐजूकेशन डायरेक्टर ने सरेन्डर करते हुए कहा कि पहले हम समझते थे कि सुन्दर नगरी ब्लॉक एफ-2 एफ-1 के बीच जो ज़मीन है वो हमारी है और पिटिशनर की जमीन इस जमीन से एक किलोमीटर से भी ज्यादा दूर पडती है लेकिन अब हम मानते हैं कि सुन्दर नगरी ब्लॉक एफ-2 एफ-1 के बीच जो ज़मीन है हमारा उस ज़मीन पर कोई क्लेम नहीं है। और अब हम उस जमीन को एक्वायर ही नहीं मानते। 18/12/2018 में माननीय हाईकोर्ट द्वारा ऑर्डर में कहा गया कि डीडीए के खसरा नम्बरान की जिस जमीन पर मुकदमा चल रहा है डीडीए के खसरा नम्बरान उस जमीन से पूरब की तरफ 100 मीटर आगे पड़ते है लिहाजा कोशचन लैन्ड से डीडीए का कोई ताल्लुक नहीं है। एरिया एसडीएम द्वारा मेरी ज़मीन को 27/02/2016 में बज़ोर ताकत तोड़ दिया गया था। फिर कोर्ट के हुक्म से डिमारकेशन की गई। एरिया एसडीएम की लाख मुखालिफत के बावजूद कैमरे के सामने मीडिया वालों के सामने एरिया एसडीएम को यह मानना ही पड़ा कि डीडीए वालों की ज़मीन सुन्दर नगरी ब्लॉक एफ-2 एफ-1 की जमीन से 100 मीटर अलग पड़ती है। यानि माननीय हाईकोर्ट द्वारा भी और एसडीएम की डिमारकेशन के द्वारा भी ज़मीन को 100 मीटर दूर पाया गया। किन्तु एरिया एसडीएम ने चूंकि ज़मीन का डेमोलेशन किया था इसलिए अपनी बेईमानी को सच्चा साबित करने कि लिए न तो हमें मौके पर डिमारकेशन की कोई रिपोर्ट दी और न हमारे साईन लिए और ना ही एसडीएम साहब ने कोई साईन किए जबकि कोर्ट का यह आदेश था कि चौ0 चमन और डीडीए के साईन लिए जाएं। और एसडीएम साहब खुद भी साईन करके दें।

और चुपचाप 3 महीने के बाद एसडीएम साहब ने टीएसएम मशीन वालों के द्वारा एक प्राईवेट आदमी से अपनी डिमारकेशन मे लिखकर डिमारकेशन पेश की। और डिमारकेशन में लिख दिया कि अगर डीडीए के खसरा नम्बर एफ-2 और एफ-1 के बीच में नहीं पडते तो चौ0 चमन के भी नम्बर नहीं पड़ते बल्कि जिस जमीन पर चौ0 चमन काबिज है उस जमीन पर  डीडीए के खसरा नम्बरान 49/2 एण्ड 54 पड़ते हैं। और उन्होंने लिखा कि यह नम्बर हमने रिकार्ड अनुसार ग्राम मण्डोली चकबंदी का शिजरा 1979/80 और 1895/96 के शिजरे से लिए हैं। लेकिन जब हमने 1979/80 का ग्राम मण्डोली का शिजरा देखा तो उस शिजरे में यह नम्बर कहीं मौजूद ही नहीं है। बल्कि यह मुस्तमिल नम्बर है। हिन्दी में इन नम्बरो को निर्भर नम्बर कहा है। अंगेजी में इन नम्बरों को डिपेंड नम्बर कहा जाता हैं। किसान लोग इन नम्बरोें को अपनी भाषा में ब्लॉक नम्बर कहते है। यानि 25-26 नम्बरों के उपर एक नम्बर बनाया जाता है जो 25-26 नम्बरों की पहचान के लिए होता है जैसे कि मेरे नम्बर हैं। 22/3, 22/4, 22/8, 22/9 व 25/20/2 यह 22 नम्बर खसरा नम्बर नहीं हैं। इसी तरह से 49/2 भी खसरा नम्बर नहीं मुस्तमिल नम्बर है। यहां पर मैं बडे अदब के साथ कहना चाहता हूं कि दिल्ली सरकार के एक एसडीएम ने रिकार्ड में इतनी बड़ी बेईमानी की कि 125 साल पुरानी मुस्तमिल नम्बरों को खसरा नम्बर बता कर मेरी ज़मीन को छीनने की कोशिश की जिसमें वो बुरी तरह नाकाम रहे। जबकि मेरी जमीन के बारे में एरिया के 4 एसडीएम कोर्ट में खुद लिखकर दे चुके है कि रिकार्ड के अनुसार चौ0 चमन के नम्बर सुन्दर नगरी के एफ-2 एफ-1 के बीच में पडते हैं। बेताब साहब! अब आप खुद ही बताइए कि चार एसडीएम, एक सब रजिस्ट्रार, एक तहसीलदार, दो कानूनगो, एक पटवारी झूठे हैं या इलाके का एसडीएम झूठा है। और मैं बड़े अदब के साथ आपके  अखबार के माध्यम से माननीय राजेन्द्रपाल गौतम जी से पूछना चाहता हूं कि 27/02/2016 को मेरी जमीन का डेमोलेशन एरिया एसडीएम साहब ने किया था वह किसके हुक्म से किया था? क्या दिल्ली सरकार के हुक्म से किया था या डीडीए वालों के हुक्म से किया था? या ऐजूकेशन वालों के हुक्म से किया था? या एमसीडी के हुक्म से किया था? या कोर्ट के हुक्म से किया था? कृप्या आप बताने की मेहरबानी करें।

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