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एक दिन गांव का जीवन!"

 एक दिन गांव का जीवन 

एस ए बेताब 

 उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के नूरपुर एवं साथ में ही मिले दूसरे गांव भमैडा गांव का भ्रमण "बेताब समाचार एक्सप्रेस "में किया कितना अलग जीवन है गांव का शहर वालों से । यह जानने की जब हमने कोशिश की तो हमने पाया जितना तेज दौड़ता है शहर ,गांव उतरा है धीरे धीरे चलता है, शहर में जितना कोलूहल है, गांव में उतनी ही शांति है। शहर में जितना टेंशन है, गांव में उतना ही सुकून है। दोनों एक दूसरे के विपरीत है ,लेकिन दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए है।  गांव से पैदा की हुई सब्जियां ,अनाज,  फल ,दूध शहरों में आता है और उससे जो पैसा मिलता है गांव वालों का जीवन चलता है। इसी तरह से गांव और शहर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। गांव में प्रदूषण मात्र नहीं  है, जबकि शहरों में प्रदूषण की भरमार हो रही है । गांव में ज्यादातर लोगों का कारोबार खेती-बाड़ी और मवेशी पालन है।  पशुपालन में यहां पर  भैंस से पाली जाती हैभैसों का दूध बेचकर अच्छी खासी रकम पैदा होती है गांव में कई डेरिया है जिनमें दूध इकट्ठा होकर  जाता है आधुनिकता की दौड़ में गांव वाले भी अब आने शुरू होोो गए हैं fridge TV washing machine  सभी चीजें गांव में मौजूद है लोगों ने शहरों जैसे मकान भी बनाना शुरू कर दिऐ  है । हां अभी भी पुराने गांव वाली झलक देखने को मिलती है ।ऐसी ही कई झलक हमने कभी देखी जिसमें असली भारत बसता है। इस गांव के किनारे पर एक कोल्हू में  गुड बन रहा था, हमने गरम गरम गुड खाया और रस भी पिया और गांव की भोजन व्यवस्था का आनंद लिया।

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