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कैसे रहेगी बेटियां सुरक्षित - भारतीय सद्भावना विकास मंच

पूरा पढ़ें... ज़रूर पढ़ें................. *आह.......... बेटियां,* *बच्चियां* ,आँगन के महकते फूल किस ने मसल डाले........ *यह किया* ....? इज़्ज़त तार तार, जीने का हक़ ख़तम, मार डाला ज़ालिम ने इंसान नहीं जानवर हैं हैवान हैं. उस का कोई सम्बन्ध नहीं धर्म से ज़ात से ना छोटी बड़ी,ऊंच नीच के नाम से बनी किसी बारादरी से जानवर का कोई धर्म नहीं और ना कोई ज़ात मुजरिम को धर्म व ज़ात के आधार से कभी नहीं देखना चाहिए *याद रहे किसी भी देश मे* क़ानून सज़ा यह सब इसी लिए हैं ताकि लोग हवस मे जानवर ज़ालिम क़ातिल ना बन जाएं *आह... ऐसे माहौल मे.....* 1 जो फौजी सिपाही देश की रक्षा करने बॉडर पर जान की बाज़ी लगा रहे हो उन्हे अपनी बेटियों की इज़्ज़त का खयाल सता रहा हो 2 एक बाप कारोबार बिज़निस के लिए बाहर गया लेकिन वो अपनी बेटियों को लेकर हर समय बेचैन हो धियान घर पर बेटियों पर रहे 3 बेटियों को स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी भेजने के बाद माँ बाप बेटियों की वापसी तक दीवार से कमर लगाए बैठे इन्तिज़ार मे हों आह यह किया हो गया समाज को प्लीज इस को धर्म ज़ात बरादरी से ना जोड़ो इस को समझो देश को एक बनाओ राजनीती ना करो सख्त क़ानून बनाओ *बेटियां बचाओ मतलब जान के साथ इज़्ज़त बचाओ* *बेटियों व बहनो की रक्षा* के लिए भाई की वही बाज़ू आगे होनी चाहिए जिस बाज़ू की कलाई पर बहन ने रक्षा के बंधन बांध कर *रक्षा करने की ज़मानत ली थी* समाज के सभी लोगों को चाहिए की बाज़ुओं को एक साथ जोड़ कर मिलाकर आगे आएं नोट. आप हमारी बात से सहमत हैं तो आगे शेर करें धन्यवाद *मौलाना जावेद सिद्दीकी* क़ासमी दिल्ली *महा सचिव* जमीअत उलमा ए हिन्द दिल्ली प्रदेश *सदर* : भारतीय सदभावना विकास मंच

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