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*आह.......... बेटियां,* *बच्चियां* ,आँगन के महकते फूल किस ने मसल डाले........
*यह किया* ....?
इज़्ज़त तार तार, जीने का हक़ ख़तम,
मार डाला ज़ालिम ने इंसान नहीं जानवर हैं हैवान हैं.
उस का कोई सम्बन्ध नहीं धर्म से ज़ात से
ना छोटी बड़ी,ऊंच नीच के नाम से बनी किसी बारादरी से
जानवर का कोई धर्म नहीं और ना कोई ज़ात
मुजरिम को धर्म व ज़ात के आधार से कभी नहीं देखना चाहिए
*याद रहे किसी भी देश मे* क़ानून सज़ा यह सब इसी लिए हैं ताकि लोग हवस मे जानवर ज़ालिम क़ातिल ना बन जाएं
*आह... ऐसे माहौल मे.....*
1 जो फौजी सिपाही देश की रक्षा करने बॉडर पर जान की बाज़ी लगा रहे हो उन्हे अपनी बेटियों की इज़्ज़त का खयाल सता रहा हो
2 एक बाप कारोबार बिज़निस के लिए बाहर गया लेकिन वो अपनी बेटियों को लेकर हर समय बेचैन हो धियान घर पर बेटियों पर रहे
3 बेटियों को स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी भेजने के बाद माँ बाप बेटियों की वापसी तक दीवार से कमर लगाए बैठे इन्तिज़ार मे हों
आह यह किया हो गया समाज को
प्लीज इस को धर्म ज़ात बरादरी से ना जोड़ो
इस को समझो देश को एक बनाओ
राजनीती ना करो सख्त क़ानून बनाओ
*बेटियां बचाओ मतलब जान के साथ इज़्ज़त बचाओ*
*बेटियों व बहनो की रक्षा* के लिए भाई की वही बाज़ू आगे होनी चाहिए जिस बाज़ू की कलाई पर बहन ने रक्षा के बंधन बांध कर *रक्षा करने की ज़मानत ली थी*
समाज के सभी लोगों को चाहिए की बाज़ुओं को एक साथ जोड़ कर मिलाकर आगे आएं
नोट. आप हमारी बात से सहमत हैं तो आगे शेर करें
धन्यवाद
*मौलाना जावेद सिद्दीकी* क़ासमी दिल्ली
*महा सचिव*
जमीअत उलमा ए हिन्द दिल्ली प्रदेश
*सदर* : भारतीय सदभावना विकास मंच
शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत* पीलीभीत: संगम फाउंडेशन व हिंदी उर्दू मंच के संयुक्त तत्वावधान में एक शानदार नातिया मुशायरा जश्ने ईद मिलादुन्नबी के सिलसिले में हाजी ज़हीर अनवर की सरपरस्ती में ग्रेस पब्लिक स्कूल ख़ुदा गंज में आयोजित किया गया जिसकी *सदारत मौलाना मुफ्ती हसन मियां क़दीरी* ने की, निज़ामत का कार्य ज़ियाउद्दीन ज़िया एडवोकेट ने किया जनाबे सदर हसन मियां कदीरी ने अपने कलाम मे कहा जलवाए हुस्ने इलाही प्यारे आका की है जात,रुख से रोशन दिन हैं उन के जुल्फ़ का सदका है रात मुशायरा कनवीनर मुजीब साहिल ने यूं फरमाया दिल के बोसीदा ज़ख्म सीने को इश्क वाले चले मदीने को हाशिम नाज़ ने अपनी नात पढ़ते हुए कहा बिना ज़िक्रे नबी मेरी कोई पहचान थोड़ी है,कि नाते मुस्तफा लिखना कोई आसान थोड़ी है नाजिम नजमी ने अपने कलाम में यूं कहा सुकूने दिल नहीं मिलता उसे सारे जमाने में बुलालो अबतो आका मुझ को अपने आस्ताने में हर सिमत यहां बारिशे अनवारे नबी है उस्ताद शायर शाद पीलीभीती ने अपने मखसूस अंदाज में कहा बन के अबरे करम चार सू छा गए जब जहां में हबीबे खुद...

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